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सम्पूर्ण घरेलू कामगार सर्वेक्षण एवं उत्थान समिति:
जहाँ मानवता सड़कों पर कराहती हों, जहाँ पुलिस मुजरिम के साथ बैठकर दारु पीती हो, जहाँ उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार अफ़सर बेटी खरीदें, लडकी के साथ छेड़्खानी करतें हों, जहाँ देश की होनहार बेटियाँ छेड़खानी से तंग आकर आत्महत्या करती हों, जहाँ की सरकार इसके वावजूद ऐसे भ्रष्ट अफ़सरों कों पदोन्नती देती हों, जहाँ लड़कियाँ पैदा होने से पहले ही गर्भ में मार दी जाती हों, जहाँ पैदा होने के बाद पग-पग पर प्यार के बदले दुत्कार सत्कार के बदले बालात्कार और इन्तजार के बद भी सिर्फ झूठी दिलासा पाकर ही जंग लड़नी पड़ती हो, एक तरफ़ परिवार समाज एवं देश को पोषण देती हो बदले मे शोषण उपहार मे पाती हो जँहा की समाज, सरकार और कानून व्यवस्था सबके सब मूक दर्शक बने बैठे हो। जहाँ की न्याय व्यवस्था, लचर, खर्चीली तथा वर्षो तक चलने वाली हों, जहाँ न्याय पाने की आस में दम घुटती हों तो फ़िर गरीब, लाचार एवं सदियों से सताई जा रही महिलायें भला न्याय की आशा कैसे कर सकती हैं। समाज में व्याप्त ऐसी ही विसंगतियों को देखकर भारत की एक बेटी उठती है। परन्तु उनकी कराह कोलाहल के बीच दबती नही है। यह कराह की आग शोषितो एवं पीड़ितों की आवाज के साथ मिलकर एक दहकता शोला बन जाती है। यही शोला समाज के बुद्दिजीवियों एवं कर्मबीरों का समर्थन पाकर एक इन्क्लाब का रुप ले लिया है जिसका नाम है-: “सम्पूर्ण घरेलू कामगार सर्वेक्षण एवं उत्थान समिति”।

इस समिति की अध्यक्षा श्रीमती प्रभा मुनि जन घरेलू कामगारों की व्यथा सुनाती है तो सुनने वालो के रोंगटें खड़े हो जाते है कभी-कभी वे दुख दर्द सुनकर फ़ूट-फ़ूटकर रोने लगती हैं। तभी बन्दूक उठाकर बदला लेने को उतारु हो जाते हैं। प्रभा दीदी उन्हें रोकती है। उनका कहना है “हम भारतीय हैं, हमारा आदर्श महात्मा गांधी है। हम जो कुछ करेंगें सरकार, समाज, और कानून के दायरे में रहकर करेंगें। हमें व्यक्ति से कम, व्यवस्था से अधिक शिकयत है। समय चाहे जो लगे, परेशनियाँ चाहे जितनी हो “जीत हमारी होगी।” आज भी अच्छे लोगों की कमी नहीं है। एक तरफ़ लाचार और परेशान लोग हमारी तरफ़ मदद मांगने आते है तो दूसरी तरफ़ मदद करने वाले भी आते हैं। ज्यों-ज्यों हमारी समिति के बारे में लोगों को पता चलता है वे हमसे जुड़ जाते हैं। हमें तन, मन और धन से भी सहायता मिल रही है। सबसे अधिक हमें नैतिक समर्थन की आवश्यकता है। एक-एक ईट से एक महल खड़ा हो जाता है। एक-एक व्यक्ति से एक देश बन जाता है। हमें खुशी है कि हमसे अवकाश प्राप्त न्यायधिश, वकील, प्रोफ़ेसर, एवं पत्रकार भी जूड़े हैं। मुझे विश्वास है कि आपका एक सदविचार हमारी दिशा बदल सकती है। हम प्रगती के पथपर हमेशा आगे बढ़ते रहेंगें। यह हमारी दॄढ़ प्रतिळा है। हमें इसी सकंल्प के साथ आगे बढ़ना है हमने अभी शुरुआत की है। आगे बढ़ने के लिये असीम संसार है। सेवा हमारा मूल मंत्र है। हमें इसी सेवा के बल पर जंग लड़नी है। इतिहास गवाह है सत्य की विजय अवश्य होती है। हम अपने सभी सहयोगी भाई – बहनों का आभिवादन करतें हैं। एवं उन बहनों को आंमन्त्रित करते हैं जिन्हें हमारी सहायता की जरुरत है। हम विश्वास दिलाना चाहतें हैं कि उनकी दु:ख दर्द में शामिल होकर उन्हें न्याय अवश्य दिलाएंगें।

हमने जो घरेलू कामगारों को न्याय दिलाने की शपथ ली है। उसमें सफ़लता की और बढ़ रहें हैं। साथ ही साथ हमारा सर्वेक्षण जारी है एवं सर्वेक्षण के जरिये हम उनकी समस्याओं से अवगत हो रहें हैं एवं साथ ही साथ समाधान का कार्य भी होता जा रहा है। हम अपने सहयोगियों के शुक्र गुजार हैं कि उनकी सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं।